1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

दमदम में तैयार होने वाले नए कारतूस हमने अभी तक बिल्कुल नहीं बांटे हैं। उसका यह कथन बिल्कुल झूठ था। अंबाला, सियालकोट और बंदूकों के प्रशिक्षण के लिए चलाए गए नए लश्करी वर्गों में ये चरबी लगे कारतूस सन् 1856 से ही भेजे जा रहे थे। अंबाला डिपों में 22,500 और सियालकोट को 14,000 कारतूस 23 अक्तूबर, 1856 को भेजे गए, फिर भी कर्नल बर्च जनवरी 1857 में सरकारी घोषणा करता है कि कारखाने से एक भी कारतूस नहीं भेजा गया।


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दमदम में तैयार होने वाले नए कारतूस हमने अभी तक बिल्कुल नहीं बांटे हैं। उसका यह कथन बिल्कुल झूठ था। अंबाला, सियालकोट और बंदूकों के प्रशिक्षण के लिए चलाए गए नए लश्करी वर्गों में ये चरबी लगे कारतूस सन् 1856 से ही भेजे जा रहे थे। अंबाला डिपों में 22,500 और सियालकोट को 14,000 कारतूस 23 अक्तूबर, 1856 को भेजे गए, फिर भी कर्नल बर्च जनवरी 1857 में सरकारी घोषणा करता है कि कारखाने से एक भी कारतूस नहीं भेजा गया।


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