में प्रवास करने लगे। उस समय क्रिमिया द्वीप में अंगे्रजों का रूस से घमासान शुरू था और रूसी भालुओं के पंजों तले ब्रिटिशा शेर भी गाय बनता जा रहा था। अजीमुल्ला खान को यह समाचार ज्ञात होते ही उसके मन मंे घुमड़ते महान् कार्य को बल मिला। स्वदेष के सीने पर नाचते अंगे्रज शेर को रूस ने कहां तक घायल किया है, उसके कितने पंजे काटे हैं तथा शेष को काटने के लिए अपने प्रिय हिंदुस्थान में होनेवाले प्रयासों में रूस की कितनी सहानुभूति या सहयोग प्राप्त करना संभव है,
में प्रवास करने लगे। उस समय क्रिमिया द्वीप में अंगे्रजों का रूस से घमासान शुरू था और रूसी भालुओं के पंजों तले ब्रिटिशा शेर भी गाय बनता जा रहा था। अजीमुल्ला खान को यह समाचार ज्ञात होते ही उसके मन मंे घुमड़ते महान् कार्य को बल मिला। स्वदेष के सीने पर नाचते अंगे्रज शेर को रूस ने कहां तक घायल किया है, उसके कितने पंजे काटे हैं तथा शेष को काटने के लिए अपने प्रिय हिंदुस्थान में होनेवाले प्रयासों में रूस की कितनी सहानुभूति या सहयोग प्राप्त करना संभव है,