1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



रहे स्वतंत्रता युद्ध में सम्मिलित होने का गुप्त उपदेश देते-देते पंडित लोग प्रत्येक तीर्थ में घूमने लगे।

विराट् जनसमूह के मन में एक ही इच्छा उत्कटता से उत्पन्न करने और उसकी अक्षय मुद्रा उनके हृदय पर अंकित करने के लिए कविता जैसा उत्तम साधन नहीं है। मार्मिक शब्द और आकर्षक पद्धति से पद्य में गुंथा हुआ सत्य जनता के हृदय में बहुत तेजी से अंकुरित होता है। इसीलिए राष्ट्रगीत की महत्ता बहुत मानी जाती है।


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रहे स्वतंत्रता युद्ध में सम्मिलित होने का गुप्त उपदेश देते-देते पंडित लोग प्रत्येक तीर्थ में घूमने लगे।

विराट् जनसमूह के मन में एक ही इच्छा उत्कटता से उत्पन्न करने और उसकी अक्षय मुद्रा उनके हृदय पर अंकित करने के लिए कविता जैसा उत्तम साधन नहीं है। मार्मिक शब्द और आकर्षक पद्धति से पद्य में गुंथा हुआ सत्य जनता के हृदय में बहुत तेजी से अंकुरित होता है। इसीलिए राष्ट्रगीत की महत्ता बहुत मानी जाती है।


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