पांच बच्चे मार डाले गए। वह भवन भी नष्ट कर दिया गया। फिर ‘दिल्ली गजट’ के छापाखाने की ओर लोग गए। मेरठ का समाचार छापने के लिए
1857 का स्वातंत्र्य समर - 110
कंपोजिटर कंपोजिंग कर रहे थे, तभी दरवाजे पर ‘दीन-दीन’ की गर्जना हुई और कुछ ही देर में छापाखाने का हर ईसाई चीर दिया गया। वहां का सबकुछ-मशीनें आदि जो कुछ भी था-फिरंगियों के स्पर्श से अपवित्र हो गया था, अतः उसका नष्ट करके क्रांति की वह भयानक हवा आगे
पांच बच्चे मार डाले गए। वह भवन भी नष्ट कर दिया गया। फिर ‘दिल्ली गजट’ के छापाखाने की ओर लोग गए। मेरठ का समाचार छापने के लिए
1857 का स्वातंत्र्य समर - 110
कंपोजिटर कंपोजिंग कर रहे थे, तभी दरवाजे पर ‘दीन-दीन’ की गर्जना हुई और कुछ ही देर में छापाखाने का हर ईसाई चीर दिया गया। वहां का सबकुछ-मशीनें आदि जो कुछ भी था-फिरंगियों के स्पर्श से अपवित्र हो गया था, अतः उसका नष्ट करके क्रांति की वह भयानक हवा आगे