पड़ी। इस प्रसंग पर भारत में अपने दमन व शोषण के काले इतिहास पर लज्जा और पश्चात्ताप का प्रकटीकरण करने के बजाए ब्रिटिश समाचार-पत्रों व बौद्विकों ने अपने राष्ट्रीय शौर्य की गर्वोक्ति और भारतीय नेताओं की निंदा का दुश्प्रयास करके लंदन में मौजूद भारतीय देशभक्तों को उद्वेलित कर दिया। यह एक प्रकार से बर्रो के छत्ते में ढेला मारने के समान था।
सन् 1857 की पचासवीं वर्षगांठ को ब्रिटेन ने विजय दिवस के रूप में मनाया। ब्रिटिश समाचार-पत्रों ने विशेषांक निकाले,
पड़ी। इस प्रसंग पर भारत में अपने दमन व शोषण के काले इतिहास पर लज्जा और पश्चात्ताप का प्रकटीकरण करने के बजाए ब्रिटिश समाचार-पत्रों व बौद्विकों ने अपने राष्ट्रीय शौर्य की गर्वोक्ति और भारतीय नेताओं की निंदा का दुश्प्रयास करके लंदन में मौजूद भारतीय देशभक्तों को उद्वेलित कर दिया। यह एक प्रकार से बर्रो के छत्ते में ढेला मारने के समान था।
सन् 1857 की पचासवीं वर्षगांठ को ब्रिटेन ने विजय दिवस के रूप में मनाया। ब्रिटिश समाचार-पत्रों ने विशेषांक निकाले,