1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

छोड़ दिल्ली की ओर स्वयं कूच किया। पर दिल्ली स्वतंत्र हो जाने का समाचार सुनने के पश्चात् उसके धक्के से अॅन्सन पूरी तरह हताशा से भर गया था। उसमें भी शिमला की ठंडी हवा में जो आज तक कभी अनुभव नहीं हुई, ऐसी गरमी में उसे झुलसना पड़ा था। इन मानसिक और शारीरिक चिंताओं से कृश हुआ वह कमांडर-इन-चीफ करनाल तक आते-आते 27 मई को कालरा की बीमारी से मर गया। उस दिन उसके अधीनस्थ अधिकारी बर्नार्ड ने कमांडर-इन-चीफ के अधिकारों को संभाला।


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छोड़ दिल्ली की ओर स्वयं कूच किया। पर दिल्ली स्वतंत्र हो जाने का समाचार सुनने के पश्चात् उसके धक्के से अॅन्सन पूरी तरह हताशा से भर गया था। उसमें भी शिमला की ठंडी हवा में जो आज तक कभी अनुभव नहीं हुई, ऐसी गरमी में उसे झुलसना पड़ा था। इन मानसिक और शारीरिक चिंताओं से कृश हुआ वह कमांडर-इन-चीफ करनाल तक आते-आते 27 मई को कालरा की बीमारी से मर गया। उस दिन उसके अधीनस्थ अधिकारी बर्नार्ड ने कमांडर-इन-चीफ के अधिकारों को संभाला।


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