यह आगे दिखेगा। परंतु इस प्रथम महŸवपूर्ण लड़ाई की गड़बड़ में भी विशेष रूप से उल्लेखिनीय एक बात अवश्य कहनी है कि उस दिन अंगे्रजों के हाथ लगी क्रांतिकारियों की तोपों की संख्या एक 13 कहता है और दूसरा पूरी 26, जबकि ये दोनों ही वहां उपस्थित सरकारी अधिकारी थे।
इस तरह दिनांक 98 जून को संध्या समय अंगे्रजी सेना ने दिल्ली की प्राचीर तक आकर तंबू ठोंके। अंबाला और मेरठ से दिल्ली की ओर अंगे्रजी सेना को अबाधित रीति
यह आगे दिखेगा। परंतु इस प्रथम महŸवपूर्ण लड़ाई की गड़बड़ में भी विशेष रूप से उल्लेखिनीय एक बात अवश्य कहनी है कि उस दिन अंगे्रजों के हाथ लगी क्रांतिकारियों की तोपों की संख्या एक 13 कहता है और दूसरा पूरी 26, जबकि ये दोनों ही वहां उपस्थित सरकारी अधिकारी थे।
इस तरह दिनांक 98 जून को संध्या समय अंगे्रजी सेना ने दिल्ली की प्राचीर तक आकर तंबू ठोंके। अंबाला और मेरठ से दिल्ली की ओर अंगे्रजी सेना को अबाधित रीति