1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

से पर पाने में आवश्यक साहस और धैर्य में प्रवीण थे। फिर भी पंजाब के सिपाहियों में स्वतंत्रता की चेतना कहां तक उत्पन्न हुई है, इसकी सही जानकारी प्राप्त करना आवश्यक था। इस कार्य पर एक ब्राह्यण ने अपना देशद्रोही कार्य उŸाम रीति से सिद्ध करके मोंटगुमरी से निवेदन किया कि ‘‘साहब, वे सारे फसादी हैं और फसाद में बुरी तरह डूबे हुए हैं।’’ ऐसा कहकर उसने अपना हाथ अपने गले से लगाकर दिखाया। इस ब्राह्यमण की यह वार्Ÿाा


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से पर पाने में आवश्यक साहस और धैर्य में प्रवीण थे। फिर भी पंजाब के सिपाहियों में स्वतंत्रता की चेतना कहां तक उत्पन्न हुई है, इसकी सही जानकारी प्राप्त करना आवश्यक था। इस कार्य पर एक ब्राह्यण ने अपना देशद्रोही कार्य उŸाम रीति से सिद्ध करके मोंटगुमरी से निवेदन किया कि ‘‘साहब, वे सारे फसादी हैं और फसाद में बुरी तरह डूबे हुए हैं।’’ ऐसा कहकर उसने अपना हाथ अपने गले से लगाकर दिखाया। इस ब्राह्यमण की यह वार्Ÿाा


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