एम वक्त खाना नहीं खाया और रात-दिन उसे पढ़ता ही रहा। पुस्तक ने मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित किया। भगत सिंह के अपने पर मैंने पुस्तक की बहुत प्रशंसा की। कुछ समय बाद भगत सिंह ने एक दिन मुझसे कहा कि ‘यदि तुम कुछ परिश्रम करो और मदद करने के लिए तैयार हो जाओ तो गुप्त रूप से इस पुस्तक को प्रकाशित करने का उपाय सोचा जाए।’ मैं पूर्ण रूप से सहायता करने को तैयार हो गया।
‘‘भगत सिंह ने किसी प्रेस में प्रबंध कर दिया।
एम वक्त खाना नहीं खाया और रात-दिन उसे पढ़ता ही रहा। पुस्तक ने मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित किया। भगत सिंह के अपने पर मैंने पुस्तक की बहुत प्रशंसा की। कुछ समय बाद भगत सिंह ने एक दिन मुझसे कहा कि ‘यदि तुम कुछ परिश्रम करो और मदद करने के लिए तैयार हो जाओ तो गुप्त रूप से इस पुस्तक को प्रकाशित करने का उपाय सोचा जाए।’ मैं पूर्ण रूप से सहायता करने को तैयार हो गया।
‘‘भगत सिंह ने किसी प्रेस में प्रबंध कर दिया।