इसके प्रकाशन से टंडन जी बहुत प्रसन्न हुए थे। इसके बेचने में सुखदेव ने बहुत अधिक परिश्रम किया था; (पृ. 89-90)
सन् 1929-30 में भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों की गिरफ्तारी के समय उनमें से अधिकांश के पास इस पुस्तक की प्रतियां पुलिस को प्राप्त हुई। सन् 1942 में जर्मनी में फ्रेंड्स आॅफ इंडिया सोसाइटी ने भी इस पुस्तक का एक संस्करण प्रकाशित किया।
आजाद हिंद फौज के निर्माण में ‘1857 का स्वातंत्र्य
इसके प्रकाशन से टंडन जी बहुत प्रसन्न हुए थे। इसके बेचने में सुखदेव ने बहुत अधिक परिश्रम किया था; (पृ. 89-90)
सन् 1929-30 में भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों की गिरफ्तारी के समय उनमें से अधिकांश के पास इस पुस्तक की प्रतियां पुलिस को प्राप्त हुई। सन् 1942 में जर्मनी में फ्रेंड्स आॅफ इंडिया सोसाइटी ने भी इस पुस्तक का एक संस्करण प्रकाशित किया।
आजाद हिंद फौज के निर्माण में ‘1857 का स्वातंत्र्य