के सारे सिपाही अपना अनुशासन बनाए हुए फिल्लौर पहंुच गए। अपने इन हजारों स्वदेश बंधुओं को अपनी ओर आते देखकर फिल्लौर पहुंच गए। अपने इन हजारों स्वदेश बंधुओं को अपनी ओर आते देखकर फिल्लौर के सिपाही पे्रम से उमड़ पड़े तथा अपनी लाइनें छोड़ भागकर आलिंगनबद्ध हुए और वह विशाल सेना स्वदेशी जमादारों, सूबेदारों की आज्ञा में दिल्ली की ओर चल पड़ी। रास्ते में एक नदी थी और उसके पर लुधियाना शहर था, जो उन देशवीरों की चरणधूलि की बाट जोह रहा था।
के सारे सिपाही अपना अनुशासन बनाए हुए फिल्लौर पहंुच गए। अपने इन हजारों स्वदेश बंधुओं को अपनी ओर आते देखकर फिल्लौर पहुंच गए। अपने इन हजारों स्वदेश बंधुओं को अपनी ओर आते देखकर फिल्लौर के सिपाही पे्रम से उमड़ पड़े तथा अपनी लाइनें छोड़ भागकर आलिंगनबद्ध हुए और वह विशाल सेना स्वदेशी जमादारों, सूबेदारों की आज्ञा में दिल्ली की ओर चल पड़ी। रास्ते में एक नदी थी और उसके पर लुधियाना शहर था, जो उन देशवीरों की चरणधूलि की बाट जोह रहा था।