1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

इन सिख लोगों को क्रांतिकारियों ने अपनी ओर करने के लिए प्रयास नहीं किए, ऐसा भी नहीं था। दिल्ली के स्वतंत्र होते ही बादशाह के एक ‘ईमानदार सेवक’ ने उन्हें पंजाब के सारे समाचार सूचित करने के लिए एक लंबा, विस्तृत एवं बहुत ही मार्मिक पत्र लिखा था। उसमें वह ईमानदार पत्र-लेखक ताजुद्दीन लिखता है-‘‘पंजाब के सारे सिख सरदार कायर, डरपोक और हिंदुस्थानी लोगों का साथ न देकर फिरंगियों के कुŸो बने हुए हैं। मैं स्वयं उनसे मिला,


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इन सिख लोगों को क्रांतिकारियों ने अपनी ओर करने के लिए प्रयास नहीं किए, ऐसा भी नहीं था। दिल्ली के स्वतंत्र होते ही बादशाह के एक ‘ईमानदार सेवक’ ने उन्हें पंजाब के सारे समाचार सूचित करने के लिए एक लंबा, विस्तृत एवं बहुत ही मार्मिक पत्र लिखा था। उसमें वह ईमानदार पत्र-लेखक ताजुद्दीन लिखता है-‘‘पंजाब के सारे सिख सरदार कायर, डरपोक और हिंदुस्थानी लोगों का साथ न देकर फिरंगियों के कुŸो बने हुए हैं। मैं स्वयं उनसे मिला,


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