1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जाता था। तमिल संस्करण का संपादन आजाद हिंद फौज के एक प्रचार अधिकारी जयमणि सुब्रह्यण्यम ने किया था। उन्होंने स्वयं ही बताया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आर्शीवाद से ही वह संस्करण तैयार हुआ था।

सावरकर द्वारा लिखित इतिहास की इस महान रचना ने सन् 1914 के गदर आंदोलन से 1943-44 की आजाद हिंद फौज तक कम-से-कम दो पीढ़ियों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। बंबई की ‘फ्री हिंदुस्तान’ साप्ताहिक पत्रिका


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जाता था। तमिल संस्करण का संपादन आजाद हिंद फौज के एक प्रचार अधिकारी जयमणि सुब्रह्यण्यम ने किया था। उन्होंने स्वयं ही बताया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आर्शीवाद से ही वह संस्करण तैयार हुआ था।

सावरकर द्वारा लिखित इतिहास की इस महान रचना ने सन् 1914 के गदर आंदोलन से 1943-44 की आजाद हिंद फौज तक कम-से-कम दो पीढ़ियों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। बंबई की ‘फ्री हिंदुस्तान’ साप्ताहिक पत्रिका


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