1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

का आदेश देता वह विद्रोहियों की ओर दौड़ चला। उसने घुड़सवारों को-‘स्वधर्म के लिए बलिदान दो। देखो, वह हरा निशान तुम्हें बुला रहा है। ‘ऐसा चिल्लाकर कहा और सारे घुड़सवार दौड़ पड़े। फिर भी, जो कोई शेष रहे उन्हें लेकर अंगे्रजों ने एक बार परेड की ओर आने का प्रयास किया। पर विद्रोहियों की मार के आगे एक क्षण भी रूकना असंभव होने के कारण उन्होंने उधर से पीठ फेरी और सबके सब नैनीताल की ओर भागने लगे। ब्रिगेडियर सिवाल्ड इस पहले ही हमले में मारा गया। कैप्टन कर्बी,


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का आदेश देता वह विद्रोहियों की ओर दौड़ चला। उसने घुड़सवारों को-‘स्वधर्म के लिए बलिदान दो। देखो, वह हरा निशान तुम्हें बुला रहा है। ‘ऐसा चिल्लाकर कहा और सारे घुड़सवार दौड़ पड़े। फिर भी, जो कोई शेष रहे उन्हें लेकर अंगे्रजों ने एक बार परेड की ओर आने का प्रयास किया। पर विद्रोहियों की मार के आगे एक क्षण भी रूकना असंभव होने के कारण उन्होंने उधर से पीठ फेरी और सबके सब नैनीताल की ओर भागने लगे। ब्रिगेडियर सिवाल्ड इस पहले ही हमले में मारा गया। कैप्टन कर्बी,


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