अपने हाथ में ले लिया। बख्त खान का नाम आगे दिल्ली की लड़ाई में हमको सुनने को मिलेगा। इस सेनापति ने सारे नेटिव सिपाहियों को स्वतंत्रता के बाद किस तरह व्यवहार करना है और नवस्थापित स्वराज्य में क्या-क्या कर्तव्य करने चाहिए, इसपर एक भाषण दिया और बाद में अंगे्रज ब्रिगेडियर की बग्घी में बैठकर यह स्वदेशी ब्रिगेडियर बरेली के रास्ते से जाने लगा। उसके साथ अलग-अलग अंगे्रज अधिकारियों की गाड़ियांें में नवनियुक्त अधिकारी
अपने हाथ में ले लिया। बख्त खान का नाम आगे दिल्ली की लड़ाई में हमको सुनने को मिलेगा। इस सेनापति ने सारे नेटिव सिपाहियों को स्वतंत्रता के बाद किस तरह व्यवहार करना है और नवस्थापित स्वराज्य में क्या-क्या कर्तव्य करने चाहिए, इसपर एक भाषण दिया और बाद में अंगे्रज ब्रिगेडियर की बग्घी में बैठकर यह स्वदेशी ब्रिगेडियर बरेली के रास्ते से जाने लगा। उसके साथ अलग-अलग अंगे्रज अधिकारियों की गाड़ियांें में नवनियुक्त अधिकारी