1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उसने उनको ‘राजद्रोही’ कह दिया। उसके मुंह से यह शब्द निकलना था कि एक गोली सनसनाती हुई आई औ वह चल बसा। चर्च की ओर जो विद्रोही गए थे वे केवल तलवारें और लाठियां लेकर गए थे, इसलिए वे बंदूकें लेने लाइनों की तरफ आए। इसी बीच सिख सिपाही और बावरची आदि नौकरों ने कुछ अंगे्रज स्त्री-पुरूषों को पास के एक राजा के यहां पहुंचाया। पर राजा द्वारा अपनी असमर्थता व्यक्त कर उन्हें निकाल देने पर वे उघड़े बदन, नंगे पैर महमंदी की ओर निकल गए। इस तरह 31 मई की संध्या


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उसने उनको ‘राजद्रोही’ कह दिया। उसके मुंह से यह शब्द निकलना था कि एक गोली सनसनाती हुई आई औ वह चल बसा। चर्च की ओर जो विद्रोही गए थे वे केवल तलवारें और लाठियां लेकर गए थे, इसलिए वे बंदूकें लेने लाइनों की तरफ आए। इसी बीच सिख सिपाही और बावरची आदि नौकरों ने कुछ अंगे्रज स्त्री-पुरूषों को पास के एक राजा के यहां पहुंचाया। पर राजा द्वारा अपनी असमर्थता व्यक्त कर उन्हें निकाल देने पर वे उघड़े बदन, नंगे पैर महमंदी की ओर निकल गए। इस तरह 31 मई की संध्या


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