को 18 मई को मिला तो उन्होंने उनपर रात में ही छापा मारने का आदेश उस रेजिमेंट को दिया।
उस आदेश को सिर-माथे लेकर उन सिपाहियों ने उस रात मेरठ के जंगल में सो रही सेना पर बहुत जोर का आक्रमण किया। परंतु जाने क्या हुआ कि मेरठ की उस मुट्ठी भर सेना पर सोते हुए-आकस्मिक और प्रबल आक्रमण होने पर भी उसमें से एक को छोड़ सारे सैनिक जीवित भाग गए। पर सिपाही उसके लिए क्या करें? उस रात अॅंधियारा भी विकट था। अंगे्रज अधिकारियों ने कहा,
को 18 मई को मिला तो उन्होंने उनपर रात में ही छापा मारने का आदेश उस रेजिमेंट को दिया।
उस आदेश को सिर-माथे लेकर उन सिपाहियों ने उस रात मेरठ के जंगल में सो रही सेना पर बहुत जोर का आक्रमण किया। परंतु जाने क्या हुआ कि मेरठ की उस मुट्ठी भर सेना पर सोते हुए-आकस्मिक और प्रबल आक्रमण होने पर भी उसमें से एक को छोड़ सारे सैनिक जीवित भाग गए। पर सिपाही उसके लिए क्या करें? उस रात अॅंधियारा भी विकट था। अंगे्रज अधिकारियों ने कहा,