ने इस अपमान का उत्तर देने के लिए 10 मई को सन् 1857 की पचासवीं वर्ष गांठ बड़ी धूमधाम से मनाई। भारतीय युवकों ने 1857 की स्मृति में अपनी छाती पर चमकदार बिल्ले लगाए। उन्होंने उपवास रखा, सभाएं कीं, जिनमें स्वतंत्र होने तक लड़ाई जारी रखने की प्रतिज्ञा ली गई। भारतीय देशभक्ती के इस सार्वजनिक प्रदर्शन से शासकीय अहंकार में डूबे अंग्रेज तिलमिला उठे। कई जगह भारतीय युवकों से झड़प की नौबत आ गई। हरनाम सिंह एवं आर. एम.
ने इस अपमान का उत्तर देने के लिए 10 मई को सन् 1857 की पचासवीं वर्ष गांठ बड़ी धूमधाम से मनाई। भारतीय युवकों ने 1857 की स्मृति में अपनी छाती पर चमकदार बिल्ले लगाए। उन्होंने उपवास रखा, सभाएं कीं, जिनमें स्वतंत्र होने तक लड़ाई जारी रखने की प्रतिज्ञा ली गई। भारतीय देशभक्ती के इस सार्वजनिक प्रदर्शन से शासकीय अहंकार में डूबे अंग्रेज तिलमिला उठे। कई जगह भारतीय युवकों से झड़प की नौबत आ गई। हरनाम सिंह एवं आर. एम.