सिपाहियों और अंगे्रजों की जब बैरकों की ओर लड़ाई हो रही थी तब शहर के लोग भी विद्रोह करेंगे, इस डर से अंगे्रज अधिकारी, उनके बाल-बच्चे सारे रास्तों पर भाग रहे थे, उस समय उन्हें आश्रय देने के लिए सिख सरदार सूरतसिंह आगे आया। बनारस के खजाने में लाखों रूपया जमा था और उसी में सिख लोगांे की भूतपूर्व पटरानी से अंगे्रजों के छीने हुए बहुत मूल्यवान रत्नालंकार भी भरे हुए थे और उस खजाने पर सिखों का कड़ा पहरा था। अर्थात् यह खजाना अपने कब्जे में लेकर,
सिपाहियों और अंगे्रजों की जब बैरकों की ओर लड़ाई हो रही थी तब शहर के लोग भी विद्रोह करेंगे, इस डर से अंगे्रज अधिकारी, उनके बाल-बच्चे सारे रास्तों पर भाग रहे थे, उस समय उन्हें आश्रय देने के लिए सिख सरदार सूरतसिंह आगे आया। बनारस के खजाने में लाखों रूपया जमा था और उसी में सिख लोगांे की भूतपूर्व पटरानी से अंगे्रजों के छीने हुए बहुत मूल्यवान रत्नालंकार भी भरे हुए थे और उस खजाने पर सिखों का कड़ा पहरा था। अर्थात् यह खजाना अपने कब्जे में लेकर,