1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

सुनाई देने लगी। जौनपुर में जो थोड़े सिख सिपाही थे वे सब बनारस की सिख रेजिमेंट के ही थे, सो वे तत्काल विद्रोहियों से मिल गए और सारा जौनपुर शहर विद्रोही ज्वाला में जलने लगा। यह देखकर जाॅइंट मजिस्टेªट क्यूपेज फिर से एक बार व्याख्यान देने खड़ा हो गया। परंतु तभी तालियों की जगह एक गोली सूं ऽ ऽ ऽ करते हुए श्रोताओं में से बाहर आई और मजिस्टेªट साहब की मृत देह गिर पड़ी। कमांडिंग आॅफिसर लेफ्टिनेंट ‘मारा’ भी गोली


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सुनाई देने लगी। जौनपुर में जो थोड़े सिख सिपाही थे वे सब बनारस की सिख रेजिमेंट के ही थे, सो वे तत्काल विद्रोहियों से मिल गए और सारा जौनपुर शहर विद्रोही ज्वाला में जलने लगा। यह देखकर जाॅइंट मजिस्टेªट क्यूपेज फिर से एक बार व्याख्यान देने खड़ा हो गया। परंतु तभी तालियों की जगह एक गोली सूं ऽ ऽ ऽ करते हुए श्रोताओं में से बाहर आई और मजिस्टेªट साहब की मृत देह गिर पड़ी। कमांडिंग आॅफिसर लेफ्टिनेंट ‘मारा’ भी गोली


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