जिले में स्थानब˜ जीवन व्यतीत कर रहे थे। क्या उन दिनों मैडम कामा और उनका कभी कोई संपर्क नहीं हुआ? क्या मैडम कामा ने उन्हें पांडुलिपि कोरिन्हो को देने की बात नहीं बताई? जी.एम. जोशी के वर्णन से लगता है कि जानवरी 1947 तक बहुत खोजबीन के बाद भी उन पांडुलिपि का पता नहीं लग पाया था और उसे खोया हुआ मान लिया गया था। इसका अर्थ होता है कि एस समय तक वीर सावरकर को भी उस पांडुलिपि को कोई अता-पता नहीं था। क्या यह
जिले में स्थानब˜ जीवन व्यतीत कर रहे थे। क्या उन दिनों मैडम कामा और उनका कभी कोई संपर्क नहीं हुआ? क्या मैडम कामा ने उन्हें पांडुलिपि कोरिन्हो को देने की बात नहीं बताई? जी.एम. जोशी के वर्णन से लगता है कि जानवरी 1947 तक बहुत खोजबीन के बाद भी उन पांडुलिपि का पता नहीं लग पाया था और उसे खोया हुआ मान लिया गया था। इसका अर्थ होता है कि एस समय तक वीर सावरकर को भी उस पांडुलिपि को कोई अता-पता नहीं था। क्या यह