1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



बनारस प्रांत के विद्रोह के बाद जनरल नील ने आस-पड़ोस के गांवों में बंदोबस्त करने के लिए यूरोपियन और सिखों की टोलियां भेजी। निराश्रित और खेतों पर उपजीविता चलानेवाले छोटे-छोटे गांवों में ये टोलियां घुस जाती और जो कोई भी रास्ते में दिखे उसे या तो वहीं काट डाला जाता था या फांसी पर लटकाया जाता था। इस फांसी पर चढ़नेवालों की संख्या इतनी होती थी कि एक फांसी रात-दिन चलाकर पूरा न पड़ने पर फांसी के खंभों की स्थायी


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बनारस प्रांत के विद्रोह के बाद जनरल नील ने आस-पड़ोस के गांवों में बंदोबस्त करने के लिए यूरोपियन और सिखों की टोलियां भेजी। निराश्रित और खेतों पर उपजीविता चलानेवाले छोटे-छोटे गांवों में ये टोलियां घुस जाती और जो कोई भी रास्ते में दिखे उसे या तो वहीं काट डाला जाता था या फांसी पर लटकाया जाता था। इस फांसी पर चढ़नेवालों की संख्या इतनी होती थी कि एक फांसी रात-दिन चलाकर पूरा न पड़ने पर फांसी के खंभों की स्थायी


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