के लिए और इसके प्रांत का मुख्यालय होने से अंगे्रजों को वहां बहुत मजबूत बंदोबस्त रखना आवश्यक था। परंतु सन् 1857 के मई माह के बिलकुल शुरू में भी सारे देश में क्या आंदोलन चल रहे हैं, यह ज्ञात न होने से इलाहाबाद में बहुत ढील चल रही थी। इलाहाबाद में क्रांति की ज्वालाएं चारों ओर से सुलगाते हुए नेताओं ने इतनी चतुराई से गोपनीयता रखी हुई थी कि यहां एक भी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 164
यूरोपियन सिपाही रखने
के लिए और इसके प्रांत का मुख्यालय होने से अंगे्रजों को वहां बहुत मजबूत बंदोबस्त रखना आवश्यक था। परंतु सन् 1857 के मई माह के बिलकुल शुरू में भी सारे देश में क्या आंदोलन चल रहे हैं, यह ज्ञात न होने से इलाहाबाद में बहुत ढील चल रही थी। इलाहाबाद में क्रांति की ज्वालाएं चारों ओर से सुलगाते हुए नेताओं ने इतनी चतुराई से गोपनीयता रखी हुई थी कि यहां एक भी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 164
यूरोपियन सिपाही रखने