आ धमका। उस दिन शहर में ऐसी अपूर्व गड़बड़ी प्रारंभ हुई कि अंगे्रजों ने कुछ तोपें बनारस की ओर के पुल निशाना साधकर रख दीं और किले के दरवाजे बंद कर लिये। रात के समय सिपाहियों ने जिन्हें कुछ समय पूर्व ही चूमा था, वे सारे अंगे्रज अधिकारी नाचते-कूदते खाना खाने मैस में गए ही थे कि तभी कुछ दूरी पर संकटसूचक बिगुल बजने लगा। वह बिगुल शायद राजनिष्ठ 6वीं रेजिमेंट के विद्रोही हो उठने का
1857 का स्वातंत्र्य समर - 165
आ धमका। उस दिन शहर में ऐसी अपूर्व गड़बड़ी प्रारंभ हुई कि अंगे्रजों ने कुछ तोपें बनारस की ओर के पुल निशाना साधकर रख दीं और किले के दरवाजे बंद कर लिये। रात के समय सिपाहियों ने जिन्हें कुछ समय पूर्व ही चूमा था, वे सारे अंगे्रज अधिकारी नाचते-कूदते खाना खाने मैस में गए ही थे कि तभी कुछ दूरी पर संकटसूचक बिगुल बजने लगा। वह बिगुल शायद राजनिष्ठ 6वीं रेजिमेंट के विद्रोही हो उठने का
1857 का स्वातंत्र्य समर - 165