दिखाई। उन्होंने किले से फिरंगी झंडा उखाड़ फेंकने से तो मना किया ही, साथ ही किले के नेटिव सिपाहियों को निःशस्त्र करके बाहर भगा देने के लिए अंगे्रजी अधिकारियों की पूरी सहायता की। इस समय सिख लोग अपनी तरफ किस तरह बने रहे, अंगे्रजों को इस बात का आश्चर्य अभी भी है।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 166
एकाध घंटे में इलाहाबाद का यह विस्तृत किला क्रांतिकारियों के हाथ में पड़ जाता, पर सिखों ने वह आधा घंटा अपने स्वदेश
दिखाई। उन्होंने किले से फिरंगी झंडा उखाड़ फेंकने से तो मना किया ही, साथ ही किले के नेटिव सिपाहियों को निःशस्त्र करके बाहर भगा देने के लिए अंगे्रजी अधिकारियों की पूरी सहायता की। इस समय सिख लोग अपनी तरफ किस तरह बने रहे, अंगे्रजों को इस बात का आश्चर्य अभी भी है।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 166
एकाध घंटे में इलाहाबाद का यह विस्तृत किला क्रांतिकारियों के हाथ में पड़ जाता, पर सिखों ने वह आधा घंटा अपने स्वदेश