शहर नहीं भरा था। सिपाहियों के विद्रोह का समय होते-न-होते इलाहाबाद शहर विद्रोह कर उठा। इधर परेड की ओर भयानक गर्जनाएं हो रही थीं, तभी उसकी प्रतिध्वनि शहर के उस घनघोर कंठ से निकलने लगी। पहले शहर की नाकेबंदी कर यूरोपियन घरों का सत्यानाश किया गया और फिर सिपाही और नागरिकों ने इकट्ठे होकर कारागृह को खोल दिया। उस कारागृह के कैदियों के मन में अंगे्रजों के प्रति इतना द्वेष भरा हुआ था जितना किसी के मन में नहीं
शहर नहीं भरा था। सिपाहियों के विद्रोह का समय होते-न-होते इलाहाबाद शहर विद्रोह कर उठा। इधर परेड की ओर भयानक गर्जनाएं हो रही थीं, तभी उसकी प्रतिध्वनि शहर के उस घनघोर कंठ से निकलने लगी। पहले शहर की नाकेबंदी कर यूरोपियन घरों का सत्यानाश किया गया और फिर सिपाही और नागरिकों ने इकट्ठे होकर कारागृह को खोल दिया। उस कारागृह के कैदियों के मन में अंगे्रजों के प्रति इतना द्वेष भरा हुआ था जितना किसी के मन में नहीं