को किले के बाहर निकाल लड़ाई के काम मंे लगा दिया। नील का
1857 का स्वातंत्र्य समर - 170
यद्यपि सिखों पर बिलकुल विश्वास नहीं था, फिर भी सिखों को उसपर पूरा विश्वास था। क्योंकि उन्होंने उस अपमान के बाद भी विद्रोहियों से मिलने से मना किया और नील के साथ पास-पड़ोस के गांवो को बेचिराग करने के लिए वे तत्काल तैयार हो गए। 17 जून को अंगे्रजी सेना शहर में घुसने लगी। उस समय की घटनाओं के संबंध में अपने बादशाह को भेजी रिपोर्ट में मौलवी कहता है-‘‘जो देशद्रोही,
को किले के बाहर निकाल लड़ाई के काम मंे लगा दिया। नील का
1857 का स्वातंत्र्य समर - 170
यद्यपि सिखों पर बिलकुल विश्वास नहीं था, फिर भी सिखों को उसपर पूरा विश्वास था। क्योंकि उन्होंने उस अपमान के बाद भी विद्रोहियों से मिलने से मना किया और नील के साथ पास-पड़ोस के गांवो को बेचिराग करने के लिए वे तत्काल तैयार हो गए। 17 जून को अंगे्रजी सेना शहर में घुसने लगी। उस समय की घटनाओं के संबंध में अपने बादशाह को भेजी रिपोर्ट में मौलवी कहता है-‘‘जो देशद्रोही,