लगा। उस दिन का आक्रमण विद्रोहियों ने नाकाम कर दिया। परंतु किला उनके पास होने से एक खंडहर बाग में बैठकर इलाहाबाद संभाले रहना शुद्ध पागलपन ही था, यह जानकर मौलवी अपने अनुयायियों के साथ 17 जून की रात को कानपुर की ओर निकल गया। दिनांक 18 जून को अंग्रेजों ने इलाहाबाद शहर में अपने सिख राजनिष्ठों के साथ प्रवेश किया।
बनारस की तरह ही इलाहाबाद फिर से अंगे्रजों के हाथ लग गया। परंतु इससे विद्रोहियों का धीरज तिल
लगा। उस दिन का आक्रमण विद्रोहियों ने नाकाम कर दिया। परंतु किला उनके पास होने से एक खंडहर बाग में बैठकर इलाहाबाद संभाले रहना शुद्ध पागलपन ही था, यह जानकर मौलवी अपने अनुयायियों के साथ 17 जून की रात को कानपुर की ओर निकल गया। दिनांक 18 जून को अंग्रेजों ने इलाहाबाद शहर में अपने सिख राजनिष्ठों के साथ प्रवेश किया।
बनारस की तरह ही इलाहाबाद फिर से अंगे्रजों के हाथ लग गया। परंतु इससे विद्रोहियों का धीरज तिल