1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

यह जान उनमें से एक ने आगे बढ़ चिल्लाकर कहा, ‘‘ईश्वर सत्य की ओर है। भाइयो, उठो, चलो!’’ यह आदेश होते ही इधर-उधर तलवारें बजने लगीं और अंतिम समय आया जान अंगे्रजी तोपें भी चलने लगी। परंतु सिपाही अब उनकी मार के बाहर निकल गए थे। इस समय अंग्रेज अधिकारियों को काट डालना संभव होते हुए भी सिपाहियों ने उन्हें नहीं छेड़ा और वे अवसर मिलते ही अपने देशबंधुओं की ओर निकल गए। और इस तरह 5 जून को कानपुर के तीन हजार सिपाही


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यह जान उनमें से एक ने आगे बढ़ चिल्लाकर कहा, ‘‘ईश्वर सत्य की ओर है। भाइयो, उठो, चलो!’’ यह आदेश होते ही इधर-उधर तलवारें बजने लगीं और अंतिम समय आया जान अंगे्रजी तोपें भी चलने लगी। परंतु सिपाही अब उनकी मार के बाहर निकल गए थे। इस समय अंग्रेज अधिकारियों को काट डालना संभव होते हुए भी सिपाहियों ने उन्हें नहीं छेड़ा और वे अवसर मिलते ही अपने देशबंधुओं की ओर निकल गए। और इस तरह 5 जून को कानपुर के तीन हजार सिपाही


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