1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

औरवहां लश्करी कौशल से उसकी रचना भी की गई। इसी समय कानपुर शहर में दंगा हो गया था। बाजार का हर छोटा-बड़ा कारीगर-हम्माल से लेकर सेठ-महाजन तक-हाथ में जो मिले उसे लेकर यूरोपियन लोगों को खोजते फिर रहे थे। कचहरी, कोर्ट और उसके अंदर के सारे अंगे्रजी नए-पुराने दफ्तर जला दिए गए और चारदीवारी में जो यूरोपियन नहीं पहुंचे थे उन्हें एक साथ मार डाला गया। इस तरह दोपहर के बारह बज गए। एक बजने तक अंगे्रजों की चारदीवारी


868 of 2102

औरवहां लश्करी कौशल से उसकी रचना भी की गई। इसी समय कानपुर शहर में दंगा हो गया था। बाजार का हर छोटा-बड़ा कारीगर-हम्माल से लेकर सेठ-महाजन तक-हाथ में जो मिले उसे लेकर यूरोपियन लोगों को खोजते फिर रहे थे। कचहरी, कोर्ट और उसके अंदर के सारे अंगे्रजी नए-पुराने दफ्तर जला दिए गए और चारदीवारी में जो यूरोपियन नहीं पहुंचे थे उन्हें एक साथ मार डाला गया। इस तरह दोपहर के बारह बज गए। एक बजने तक अंगे्रजों की चारदीवारी


868 of 2102