1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

और स्वतंत्रता को सिंहासनारूढ़ न कर लिया जाए। जब कभी कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता के लिए जाग्रत होता है; जब कभी स्वतंत्रता का बीज उसके पिता के लहू में अंकुरित होता है और जब कभी एक भी सच्चा पुत्र अपने पिता के रक्त का प्रतिरोध लेने के लिए जीवित, तब तक ऐसे संग्राम का कभी अंत नहीं हो सकता। क्रांतिकारी युद्ध में कोई विराम नहीं है। स्वतंत्रता अथवा मृत्यु मिलने पर ही इसका अंत होता है। आपकी स्मृति से प्रेरित


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और स्वतंत्रता को सिंहासनारूढ़ न कर लिया जाए। जब कभी कोई व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता के लिए जाग्रत होता है; जब कभी स्वतंत्रता का बीज उसके पिता के लहू में अंकुरित होता है और जब कभी एक भी सच्चा पुत्र अपने पिता के रक्त का प्रतिरोध लेने के लिए जीवित, तब तक ऐसे संग्राम का कभी अंत नहीं हो सकता। क्रांतिकारी युद्ध में कोई विराम नहीं है। स्वतंत्रता अथवा मृत्यु मिलने पर ही इसका अंत होता है। आपकी स्मृति से प्रेरित


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