जाने के बाद विद्रोही लौट आते। विद्रोहियों के तोपखाने ने जितनी दृढ़ता और साहस इस युद्ध में दर्शाया उतना पैदल और घुड़सवारों ने नहीं दिखाया, यह दोष ध्यान में रखने योग्य है। दिल्ली और लखनऊ के घेरे में इस दोष का प्रकटीकरण विशेष रूप से दिखेगा। परंतु कानपुर की लड़ाई में भी तोपों पर सारा बोझ डालकर सिपाही आमने-सामने के युद्ध के लिए अधिक तैयार नहीं होते थे, यह सत्य दिखता है। सारे ही सिपाही मृत्यु से डरते थे, ऐसा
जाने के बाद विद्रोही लौट आते। विद्रोहियों के तोपखाने ने जितनी दृढ़ता और साहस इस युद्ध में दर्शाया उतना पैदल और घुड़सवारों ने नहीं दिखाया, यह दोष ध्यान में रखने योग्य है। दिल्ली और लखनऊ के घेरे में इस दोष का प्रकटीकरण विशेष रूप से दिखेगा। परंतु कानपुर की लड़ाई में भी तोपों पर सारा बोझ डालकर सिपाही आमने-सामने के युद्ध के लिए अधिक तैयार नहीं होते थे, यह सत्य दिखता है। सारे ही सिपाही मृत्यु से डरते थे, ऐसा