उलटे कारण न होते हुए भी एकदम भागमभाग मचाकर सब ओर गढ़बड़ी फैलाने का कुछ सिपाहियों ने मानो ठेका ही ले रखा था। उनके इस अवसान घात के कारण दूसरों को भी वापस आना पड़ता था। उनके इस अवसान घात के कारण दूसरों को भी वापस आना पड़ता था। अवध के शूर सिपाहियों की तरह उदाŸा हृदय, शीश और बाहु दूसरों की राह न देखकर स्वयं जो हो सके वह देश-सेवा करते वीर मुक्ति प्राप्त करते रहे। एक दिन हमला विफल हुआ तो भी एक सिपाही मरने का
उलटे कारण न होते हुए भी एकदम भागमभाग मचाकर सब ओर गढ़बड़ी फैलाने का कुछ सिपाहियों ने मानो ठेका ही ले रखा था। उनके इस अवसान घात के कारण दूसरों को भी वापस आना पड़ता था। उनके इस अवसान घात के कारण दूसरों को भी वापस आना पड़ता था। अवध के शूर सिपाहियों की तरह उदाŸा हृदय, शीश और बाहु दूसरों की राह न देखकर स्वयं जो हो सके वह देश-सेवा करते वीर मुक्ति प्राप्त करते रहे। एक दिन हमला विफल हुआ तो भी एक सिपाही मरने का