1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उस गांव से धन की सहायता आ रही थी। परंतु केवल इन स्वयंसेवकों की भीड़ ही कानपुर की ओर आ रही थी, ऐसा नहीं था। विद्रोह में विफल और हारे हुए अनाथ, अंगे्रजी दासता से बेजार हुए लोग भी, नाना के झंडे के नीचे फिरंगियों से प्रतिशोध लेना चाहिए, ऐसी


1857 का स्वातंत्र्य समर - 194

गर्जना करते रात-दिन आ रहे थे। जलाए गए गावों का धुआं वहां आ गया। मृत व्यक्तियों की आत्मा के विकृत भूत भी वहां आए थे। इलाहाबाद और काशी


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उस गांव से धन की सहायता आ रही थी। परंतु केवल इन स्वयंसेवकों की भीड़ ही कानपुर की ओर आ रही थी, ऐसा नहीं था। विद्रोह में विफल और हारे हुए अनाथ, अंगे्रजी दासता से बेजार हुए लोग भी, नाना के झंडे के नीचे फिरंगियों से प्रतिशोध लेना चाहिए, ऐसी


1857 का स्वातंत्र्य समर - 194

गर्जना करते रात-दिन आ रहे थे। जलाए गए गावों का धुआं वहां आ गया। मृत व्यक्तियों की आत्मा के विकृत भूत भी वहां आए थे। इलाहाबाद और काशी


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