1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

‘‘क्यों कर्नल साहब, ये परेड आपको कैसी लगी? रेजिमेंट की वरदी कैसी है?’’ ऐसी बात करते-करते उसने उसे नीचे खींचा और तलवार से उसके टुकड़े कर दिए। उस कर्नल की स्त्री पास ही खड़ी थी। उसे कुछ लोग कहने लगे, ‘‘तू स्त्री है, इसलिए तुझे जीवनदान दिया!’’ पर एक क्रूर साथी चिल्लाया, ‘‘अरे हटो! स्त्री! पर यह गोरी है न? फिर कर दो टुकड़ें’’ वाक्य समाप्त होने के पहले उस वाक्य के भयानक अर्थ की पूर्ति हो चुकी थी।

नदी में सारी नौकाएं अनाज आदि से भरी तैयार थीं,


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‘‘क्यों कर्नल साहब, ये परेड आपको कैसी लगी? रेजिमेंट की वरदी कैसी है?’’ ऐसी बात करते-करते उसने उसे नीचे खींचा और तलवार से उसके टुकड़े कर दिए। उस कर्नल की स्त्री पास ही खड़ी थी। उसे कुछ लोग कहने लगे, ‘‘तू स्त्री है, इसलिए तुझे जीवनदान दिया!’’ पर एक क्रूर साथी चिल्लाया, ‘‘अरे हटो! स्त्री! पर यह गोरी है न? फिर कर दो टुकड़ें’’ वाक्य समाप्त होने के पहले उस वाक्य के भयानक अर्थ की पूर्ति हो चुकी थी।

नदी में सारी नौकाएं अनाज आदि से भरी तैयार थीं,


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