1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



डूबने लगा, कोई जलने लगा और सारे-के-सारे जल्दी या देर में गोलियांे से चित हो गए। मांस के लोथड़े, कटे सिर, टूटे बाल, छिन्न हुए हाथ, टूटे पैर, रक्त की बाढ़। सारा गंगाजल लाल-लाल हो गया। पानी में से कोई अंगे्रज सिर उठाता कि उसे गोली लग जाती। पानी में सिर छिपाए तो घुटकर मर जाए, ऐसा हरदेव का कोप हुआ। प्लासी का ऐसा वार्षिकोत्सव मनाया गया।

यह प्रातः दस बजे का समय था। श्रीमंत नाना उस दिन उस समय अपने दीवानखाने में अकेले ही चक्कर लगा रहे थे,


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डूबने लगा, कोई जलने लगा और सारे-के-सारे जल्दी या देर में गोलियांे से चित हो गए। मांस के लोथड़े, कटे सिर, टूटे बाल, छिन्न हुए हाथ, टूटे पैर, रक्त की बाढ़। सारा गंगाजल लाल-लाल हो गया। पानी में से कोई अंगे्रज सिर उठाता कि उसे गोली लग जाती। पानी में सिर छिपाए तो घुटकर मर जाए, ऐसा हरदेव का कोप हुआ। प्लासी का ऐसा वार्षिकोत्सव मनाया गया।

यह प्रातः दस बजे का समय था। श्रीमंत नाना उस दिन उस समय अपने दीवानखाने में अकेले ही चक्कर लगा रहे थे,


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