1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के दूसरे भाग का नील के आदेशों में अभाव ही मिलता है-यह जाते-जाते कहना ही होगा।

नाना का आदेश जब सŸाीचैरा पर पहंुचा, उस समय सिपाहियों के शिकार का खेल पूरे रंग पर था। नौकाओं के कड़कड़ाकर गिरते ढेर में गोरे जल रहे थे तो कितने ही तैरकर पार निकले जाने के प्रयास में थे। उनके पीछे शिकारी कुŸाों-से आपे से बाहर क्रोध से गुर्राते सिपाही भी तैरने लगे। दांत में तलवारें पकड़ और हाथ में पिस्तौलें लेकर पानी मंे सिपाहियों


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के दूसरे भाग का नील के आदेशों में अभाव ही मिलता है-यह जाते-जाते कहना ही होगा।

नाना का आदेश जब सŸाीचैरा पर पहंुचा, उस समय सिपाहियों के शिकार का खेल पूरे रंग पर था। नौकाओं के कड़कड़ाकर गिरते ढेर में गोरे जल रहे थे तो कितने ही तैरकर पार निकले जाने के प्रयास में थे। उनके पीछे शिकारी कुŸाों-से आपे से बाहर क्रोध से गुर्राते सिपाही भी तैरने लगे। दांत में तलवारें पकड़ और हाथ में पिस्तौलें लेकर पानी मंे सिपाहियों


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