घी-रोटी खिलाकर एक माह मेहमानी करके इलाहाबाद भिजवा दिया।
सारांश यह कि कानपुर में 7 जून को जो एक हजार अंगे्रज जीवित थे उनमें से चार पुरूष और एक सौ पच्चीस स्त्री-पुरूष ही 30 जून को जीवित थे। उनमें से ये एक सौ पच्चीस स्त्री, बच्चे नाना की कैद में थे और चार अधमारे पुरूष दुर्विजय सिंह के दीवानखाने में दवा-दारू करवा रहे थे। पर यह सुची अभी अंतिम नहीं हुई है, इसमें भी अभी जोड़-घटाव होना है। यह जोड़-घटाव होने
घी-रोटी खिलाकर एक माह मेहमानी करके इलाहाबाद भिजवा दिया।
सारांश यह कि कानपुर में 7 जून को जो एक हजार अंगे्रज जीवित थे उनमें से चार पुरूष और एक सौ पच्चीस स्त्री-पुरूष ही 30 जून को जीवित थे। उनमें से ये एक सौ पच्चीस स्त्री, बच्चे नाना की कैद में थे और चार अधमारे पुरूष दुर्विजय सिंह के दीवानखाने में दवा-दारू करवा रहे थे। पर यह सुची अभी अंतिम नहीं हुई है, इसमें भी अभी जोड़-घटाव होना है। यह जोड़-घटाव होने