शाॅल, साफे आदि पुरस्कार स्वयं लाॅरेंस ने अपने हाथ से दिए। लेकिन कितना विरोधाभास! इन पुरस्कार प्राप्त राजनिष्ठों को ही कुछ समय बाद विद्रोह के षड्यंत्र में सम्मिलित सिद्ध होने पर फांसी दी गई।
राजनष्ठिा का यह दरबार 12 मई को हुआ और 13 मई को खबर आई कि मेरठ शहर ने विद्रोह किया और 14 मई को समाचार आया-दिल्ली पर विद्रोहियों का कब्जा हो गया है और वहां स्वतंत्रता की घोषणा हो गई है।
ये समाचार आते ही सर हेनरी
शाॅल, साफे आदि पुरस्कार स्वयं लाॅरेंस ने अपने हाथ से दिए। लेकिन कितना विरोधाभास! इन पुरस्कार प्राप्त राजनिष्ठों को ही कुछ समय बाद विद्रोह के षड्यंत्र में सम्मिलित सिद्ध होने पर फांसी दी गई।
राजनष्ठिा का यह दरबार 12 मई को हुआ और 13 मई को खबर आई कि मेरठ शहर ने विद्रोह किया और 14 मई को समाचार आया-दिल्ली पर विद्रोहियों का कब्जा हो गया है और वहां स्वतंत्रता की घोषणा हो गई है।
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