1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

बोरियां नदी में फेंक भी दी। अब और भी मजा आ गया, उसी दिन दोपहर के समय यूरोपियन लोगों के बगीचों में एकाएक सिपाही घुस गए और चाहे जिस पेड़ पर चढ़कर आनंद से फल खाने लगे। अंगे्रज अधिकारी चिल्लाते रहे, पर सिपाहियों का फलाहार किसी तरह भी रोका न जा सका।

इस तरह भयंकर फलाहार करने के बाद उसे हजम करने के लिए उतना ही भयंकर व्यायाम शुरू हो गया। 3 जून को सिपाहियों की एक टोली ने खजाने पर हमला


1857 का स्वातंत्र्य समर - 207


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बोरियां नदी में फेंक भी दी। अब और भी मजा आ गया, उसी दिन दोपहर के समय यूरोपियन लोगों के बगीचों में एकाएक सिपाही घुस गए और चाहे जिस पेड़ पर चढ़कर आनंद से फल खाने लगे। अंगे्रज अधिकारी चिल्लाते रहे, पर सिपाहियों का फलाहार किसी तरह भी रोका न जा सका।

इस तरह भयंकर फलाहार करने के बाद उसे हजम करने के लिए उतना ही भयंकर व्यायाम शुरू हो गया। 3 जून को सिपाहियों की एक टोली ने खजाने पर हमला


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