ही मार डाला गया। थाॅर्नहिल और उसकी पत्नी भी गोली लगने से मर गए। रामकोट के जमींदार की शरण में चले गए और आठ-आठ, दस-दस माह तक सुरक्षित रखकर लखनऊ पहुंचाए गए। सीतापुर के सारे सिपाही फिर फर्रूखाबाद की ओर चले गए। वहां के यूरोपियनों ने जिस किले का आश्रय लिया था वह किला बहुत प्रयास से जीतने के बाद उन्होंने सारे यूरोपियनों को काट डाला। नवाब तफुज्जुर हुसैन खान को अंगे्रजों द्वारा अधिगृहीत गद्दी पर फिर से बैठाया
ही मार डाला गया। थाॅर्नहिल और उसकी पत्नी भी गोली लगने से मर गए। रामकोट के जमींदार की शरण में चले गए और आठ-आठ, दस-दस माह तक सुरक्षित रखकर लखनऊ पहुंचाए गए। सीतापुर के सारे सिपाही फिर फर्रूखाबाद की ओर चले गए। वहां के यूरोपियनों ने जिस किले का आश्रय लिया था वह किला बहुत प्रयास से जीतने के बाद उन्होंने सारे यूरोपियनों को काट डाला। नवाब तफुज्जुर हुसैन खान को अंगे्रजों द्वारा अधिगृहीत गद्दी पर फिर से बैठाया