1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ने अपनी महिलाएं मिटौली के राजा के यहां भेजीं तो उस राजा ने उनसे कहा कि तुम्हें मेरे जंगल में छिपकर रहना पड़ेगा। तुम्हारी खुली सुरक्षा करने की क्षमता मुझमें नहीं है; क्योंकि पूरे अवध के सिपाहियों ने विद्रोह करने की शपथ ली हुई है। उस राजा के पास अपनी महिलाएं पहुंचाने के बाद महम्मदी के अंगे्रज अधिकारियों ने वहां के किले में शरण ली। इसी दिन-जैसाकि पहले कहा गया है-रूहेलखंड के शाहजहांपुर से भागते हुए अंगे्रज


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ने अपनी महिलाएं मिटौली के राजा के यहां भेजीं तो उस राजा ने उनसे कहा कि तुम्हें मेरे जंगल में छिपकर रहना पड़ेगा। तुम्हारी खुली सुरक्षा करने की क्षमता मुझमें नहीं है; क्योंकि पूरे अवध के सिपाहियों ने विद्रोह करने की शपथ ली हुई है। उस राजा के पास अपनी महिलाएं पहुंचाने के बाद महम्मदी के अंगे्रज अधिकारियों ने वहां के किले में शरण ली। इसी दिन-जैसाकि पहले कहा गया है-रूहेलखंड के शाहजहांपुर से भागते हुए अंगे्रज


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