हमारी बहनों का दौर है। अंगे्रज़ सिपाही हमारे देशवासियों का खून कर रहे हैं, हमारी बहनों को अपमानित कर रहे हैं-हमारे खर्च ही से यात्रा का किराया और पेंशन देकर स्वदेश भेजे जाने के लिए ! हम लोग अंधकार में हैं-ईश्वर कहां है? मेरी, तुम आशावादिनी हो सकती हो, लेकिन क्या मेरे लिए यह सम्भव है? मान लो तुम इस पत्र को केवल प्रकाशित भर कर दो-तो उस कानून का सहारा लेकर जो अभी-अभी भारत में पारित हुआ है, अंगे्रज़ सरकार मुझे यहां से भारत
हमारी बहनों का दौर है। अंगे्रज़ सिपाही हमारे देशवासियों का खून कर रहे हैं, हमारी बहनों को अपमानित कर रहे हैं-हमारे खर्च ही से यात्रा का किराया और पेंशन देकर स्वदेश भेजे जाने के लिए ! हम लोग अंधकार में हैं-ईश्वर कहां है? मेरी, तुम आशावादिनी हो सकती हो, लेकिन क्या मेरे लिए यह सम्भव है? मान लो तुम इस पत्र को केवल प्रकाशित भर कर दो-तो उस कानून का सहारा लेकर जो अभी-अभी भारत में पारित हुआ है, अंगे्रज़ सरकार मुझे यहां से भारत