नहीं है। जीवन का चिहृ है विस्तार। हमें संकीर्ण सीमा के बारह जाना होगा, हृदय का प्रसार करना होगा, और यह दिखाना होगा कि हम जीवित हैं, अन्यथा हमें इस पतन की दशा में सड़कर मरना होगा, इसके सिवा दूसरा रास्ता नहीं है। इन दोनों में से एक चुन लो, फिर जिओ या मरो। छोटी-छोटी बातों को लेकर हमारे देश में जो द्वेष और कलह हुआ करता है, वह हम लोगों में सभी को मालूम है। परन्तु मेरी बात मानो, ऐसा सभी देशों में है। जिन सब देशों के जीवन का मेरूदंड राजनीति है,
नहीं है। जीवन का चिहृ है विस्तार। हमें संकीर्ण सीमा के बारह जाना होगा, हृदय का प्रसार करना होगा, और यह दिखाना होगा कि हम जीवित हैं, अन्यथा हमें इस पतन की दशा में सड़कर मरना होगा, इसके सिवा दूसरा रास्ता नहीं है। इन दोनों में से एक चुन लो, फिर जिओ या मरो। छोटी-छोटी बातों को लेकर हमारे देश में जो द्वेष और कलह हुआ करता है, वह हम लोगों में सभी को मालूम है। परन्तु मेरी बात मानो, ऐसा सभी देशों में है। जिन सब देशों के जीवन का मेरूदंड राजनीति है,