गबन - Gaban



बुझती हुई आग में तेल पड़ गया। जालपा तड़पकर बोली--वह मेरे कौन होते हैं,जो उनसे पूछूँ?

रमानाथ--कोई नहीं होते?

जालपा--कोई नहीं! अगर कोई होते, तो मुझे यों न छोड़ देते। रूपये रखते हुए कोई अपने प्रियजनों का कष्ट नहीं देख सकता ये लोग क्या मेरे आंसू न पोंछ सकते थे? मैं दिन-के दिन यहां पड़ी रहती हूं, कोई झूठों भी पूछता है? मुहल्ले की स्त्रियां मिलने आती हैं, कैसे मिलूं ? यह सूरत तो मुझसे नहीं दिखाई जाती। न कहीं आना न जाना,


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बुझती हुई आग में तेल पड़ गया। जालपा तड़पकर बोली--वह मेरे कौन होते हैं,जो उनसे पूछूँ?

रमानाथ--कोई नहीं होते?

जालपा--कोई नहीं! अगर कोई होते, तो मुझे यों न छोड़ देते। रूपये रखते हुए कोई अपने प्रियजनों का कष्ट नहीं देख सकता ये लोग क्या मेरे आंसू न पोंछ सकते थे? मैं दिन-के दिन यहां पड़ी रहती हूं, कोई झूठों भी पूछता है? मुहल्ले की स्त्रियां मिलने आती हैं, कैसे मिलूं ? यह सूरत तो मुझसे नहीं दिखाई जाती। न कहीं आना न जाना,


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