गबन - Gaban



रमेश--अजी वह दिन गए, जब आप मुझे मात दिया करते थे। आजकल चन्द्रमा बलवान हैं। इधर मैंने एक मां सि' किया है। क्या मजाल कि कोई मात दे सके। फिर शह!

रमानाथ--जी तो चाहता है, दूसरी बाज़ी मात देकर जाऊं, मगर देर होगी।

रमेश--देर क्या होगी। अभी तो नौ बजे हैं। खेल लो, दिल का अरमान निकल जाय। यह शह और मात!

रमानाथ--अच्छा कल की रही। कल ललकार कर पांच मातें न दी हों तो कहिएगा।

रमेश--अजी जाओ भी, तुम मुझे क्या मात दोगे! हिम्मत हो, तो अभी सही!


126 of 1203



रमेश--अजी वह दिन गए, जब आप मुझे मात दिया करते थे। आजकल चन्द्रमा बलवान हैं। इधर मैंने एक मां सि' किया है। क्या मजाल कि कोई मात दे सके। फिर शह!

रमानाथ--जी तो चाहता है, दूसरी बाज़ी मात देकर जाऊं, मगर देर होगी।

रमेश--देर क्या होगी। अभी तो नौ बजे हैं। खेल लो, दिल का अरमान निकल जाय। यह शह और मात!

रमानाथ--अच्छा कल की रही। कल ललकार कर पांच मातें न दी हों तो कहिएगा।

रमेश--अजी जाओ भी, तुम मुझे क्या मात दोगे! हिम्मत हो, तो अभी सही!


126 of 1203