तो मुझे बहुत गहने मिल जाएंगे। मैं अम्मांजी को यह दिखाना चाहती हूं कि जालपा तुम्हारे गहनों की भूखी नहीं है।
रमा ने संतोष देते हुए कहा--मेरी समझ में तो तुम्हें हार रख लेना चाहिए। सोचो, उन्हें कितना दुःख होगा। विदाई के समय यदि न दिया तो, तो अच्छा ही किया। नहीं तो और गहनों के साथ यह भी चला जाता।
जालपा--मैं इसे लूंगी नहीं, यह निश्चय है।
रमानाथ--आखिर क्यों?
जालपा--मेरी इच्छा!
रमानाथ--इस इच्छा का कोई कारण भी तो होगा?
तो मुझे बहुत गहने मिल जाएंगे। मैं अम्मांजी को यह दिखाना चाहती हूं कि जालपा तुम्हारे गहनों की भूखी नहीं है।
रमा ने संतोष देते हुए कहा--मेरी समझ में तो तुम्हें हार रख लेना चाहिए। सोचो, उन्हें कितना दुःख होगा। विदाई के समय यदि न दिया तो, तो अच्छा ही किया। नहीं तो और गहनों के साथ यह भी चला जाता।
जालपा--मैं इसे लूंगी नहीं, यह निश्चय है।
रमानाथ--आखिर क्यों?
जालपा--मेरी इच्छा!
रमानाथ--इस इच्छा का कोई कारण भी तो होगा?