भड़क उठे। यह जडाऊ हार उसकी गर्दन में कितनी शोभा देगा। वह हार एक सहस्र मणि-रंजित नजरों से उसके मन को खींचने लगा। वह अभिभूत होकर उसकी ओर ताक रहा था, पर मुंह से कुछ कहने का साहस न होता था। कहीं गंगू ने तीन सौ रूपये उधार लगाने से इंकार कर दिया, तो उसे कितना लज्जित होना पड़ेगा। गंगू ने उसके मन का संशय ताड़कर कहा, 'आपके लायक तो बाबूजी यही चीज़ है, अंधेरे घर में रख दीजिए, तो उजाला हो जाय।'
रमानाथ-'पसंद तो मुझे भी यही है, लेकिन मेरे पास कुल तीन सौ रूपये हैं,
भड़क उठे। यह जडाऊ हार उसकी गर्दन में कितनी शोभा देगा। वह हार एक सहस्र मणि-रंजित नजरों से उसके मन को खींचने लगा। वह अभिभूत होकर उसकी ओर ताक रहा था, पर मुंह से कुछ कहने का साहस न होता था। कहीं गंगू ने तीन सौ रूपये उधार लगाने से इंकार कर दिया, तो उसे कितना लज्जित होना पड़ेगा। गंगू ने उसके मन का संशय ताड़कर कहा, 'आपके लायक तो बाबूजी यही चीज़ है, अंधेरे घर में रख दीजिए, तो उजाला हो जाय।'
रमानाथ-'पसंद तो मुझे भी यही है, लेकिन मेरे पास कुल तीन सौ रूपये हैं,