रमानाथ-'नहीं जी, बहुत जल्द बना देगा, कसम खा रहा था।'
जालपा-'ऊह, जब चाहे दे! '
उत्कंठा की चरम सीमा ही निराशा है। जालपा मुंह उधरकर लेटने जा रही थी, कि रमा ने ज़ोर से कहकहा मारा। जालपा चौंक पड़ी। समझ गई, रमा ने शरारत की थी। मुस्कराती हुई बोली, 'तुम भी बडे नटखट हो क्या लाए?
रमानाथ-' कैसा चकमा दिया?'
जालपा-'यह तो मरदों की आदत ही है, तुमने नई बात क्या की?'
जालपा दोनों आभूषणों को देखकर निहाल हो गई। ह्रदय में आनंद
रमानाथ-'नहीं जी, बहुत जल्द बना देगा, कसम खा रहा था।'
जालपा-'ऊह, जब चाहे दे! '
उत्कंठा की चरम सीमा ही निराशा है। जालपा मुंह उधरकर लेटने जा रही थी, कि रमा ने ज़ोर से कहकहा मारा। जालपा चौंक पड़ी। समझ गई, रमा ने शरारत की थी। मुस्कराती हुई बोली, 'तुम भी बडे नटखट हो क्या लाए?
रमानाथ-' कैसा चकमा दिया?'
जालपा-'यह तो मरदों की आदत ही है, तुमने नई बात क्या की?'
जालपा दोनों आभूषणों को देखकर निहाल हो गई। ह्रदय में आनंद