चीज़ के लिए न कहूंगी। इसके रूपये देकर ही मेरे दिल का बोझ हल्का होगा।'
रमा गर्व से बोला, 'रूपये की क्या चिंता! हैं ही कितने! '
जालपा-'ज़रा अम्मांजी को दिखा आऊं, देखें क्या कहती हैं! '
रमानाथ-'मगर यह न कहना, उधार लाए हैं।'
जालपा इस तरह दौड़ी हुई नीचे गई, मानो उसे वहां कोई निधि मिल जायगी।
आधी रात बीत चुकी थी। रमा आनंद की नींद सो रहा था। जालपा ने छत पर आकर एक बार आकाश की ओर देखा। निर्मल चांदनी छिटकी हुई थी,वह कार्तिक की चांदनी जिसमें संगीत की शांति हैं,
चीज़ के लिए न कहूंगी। इसके रूपये देकर ही मेरे दिल का बोझ हल्का होगा।'
रमा गर्व से बोला, 'रूपये की क्या चिंता! हैं ही कितने! '
जालपा-'ज़रा अम्मांजी को दिखा आऊं, देखें क्या कहती हैं! '
रमानाथ-'मगर यह न कहना, उधार लाए हैं।'
जालपा इस तरह दौड़ी हुई नीचे गई, मानो उसे वहां कोई निधि मिल जायगी।
आधी रात बीत चुकी थी। रमा आनंद की नींद सो रहा था। जालपा ने छत पर आकर एक बार आकाश की ओर देखा। निर्मल चांदनी छिटकी हुई थी,वह कार्तिक की चांदनी जिसमें संगीत की शांति हैं,